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लेखनी कहानी -08-Jan-2023

(ॐ स सूर्याय नम : !)

कनक बदन धारे प्रभु आबतु !
चहुँदिशि घेरे बिकटु अँधेरो , निकरि अँजोरु दिखाबतु ।।
भक्ति भाउ भरि अर्घ चढ़त नितु , सबहिं दिनेसु मनाबतु ।।
आदिदेउ प्रत्यक्ष दिखतु हौ ,  रोगु-दोखु हर जाबतु ।।
विश्वेश्वरु सिद्धेश्वरु देवा , कबहुँ नाहिं भरमाबतु ।।
रससागरु सुखसागरु दिनकरु , निर्विकार सरसाबतु ।।
सप्ततुरगरथु गमनु करतु रवि , दृष्टि परतु बहु भाबतु ।।
हे कृपालु हे अदितीनन्दनु , हिया माहिं छबि छाबतु ।।
दयादृष्टि रखिहौ अबोधु पै , स्वारथु लसि हौं ध्याबतु ।।

                                                 सुप्रभातम् !

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3 Comments

Muskan khan

09-Jan-2023 06:05 PM

Well done

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Sushi saxena

08-Jan-2023 08:21 PM

👌👌👌

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बहुत खूब

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